
बुँदे बारिश की सुहानी लगती है इसकदर
जी भर के खेलना चाहता हूँ बचपन की तरह
वही उन्माद ,वही चाहत ,वही प्रेम
सब कुछ सवतंत्र मन से बचपन की तरह
हर बूंद जैसे मन पर गिरती है ,
हर बूंद जैसे सांसो को भिगो देती है
हर साँस भी चल रही थी बचपन की तरह
बचपन मासूम ,भोला ,नटखट और उन्मुक्त बंधन से
जी भर के खेलने को जी कर रहा है ,
आज रात जो बारिश आई तो मनो
लहर सी दौड़ पड़ी ,मै बाहर आया
बारिश में भीगा ,हर बूंद को महसूस किया
खूब बचपना करने की कोशिस भी की
पर आज ऐसा कुछ भी नहीं था बचपन की तरह
कुछ लोग बेघर हो इंजर में थे बारिश के जाने का
शायद मुझे देख कुछ बडबडा भी रहे थे
अब ऐह्शास हुआ अब कुछ भी नहीं रहा बचपन की तरह ,
आज रात बारिश आई तो सोचा जी लूँ थोडा बचपन की तरह
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