Thursday, August 4, 2011

जिंदगी वैसी ही गुजरी जैसा तुमने कहा था

जिंदगी वैसी ही गुजरी जैसा तुमने कहा था ,
हर रात वैसी ही बीती जैसा तुमसे सुना था 
हर तरफ बस जालसाजी का बस्ता लिए वो मिले 
जैसा तुमने वास्तविक में मेरी सांसे से कहा था 


अब तलक हैरान हूँ मै, क्यूँ मै चलता जा रहा 
किस तरह के अंत का मै रास्ता बनता बुनता रहा 
मिन्जिलों के पीछे छोड़ रास्तों पर बढता गया 
जिंदगी ऐसी मिली जैसा तुमने कहा था !

अब तलक तो हर साँस में ख़ुशी का हालत है 
अब तो हमको बस सांसों का ही अहसास है 
देखते है कब तलक हम तुमको खोजेंगे इस कदर 
क्या पता कर राम का हिउ नाम सत्य हो जाये
जिंदगी वैसी ही गुजरी जैसा तुमने कहा था ,
हर रात वैसी ही बीती जैसा तुमसे सुना था !


अब तलक तो बस उदर की ही लड़ाई लड़ रहा
तुमसे मिलने के वास्ते रेत पर मै चल रहा 
तुम न तो सही फिर भी तुम्हे बतला दूँ मै
तुम नहीं तो जिंदगी में बस अँधेरा चाहिए 
जिंदगी वैसी ही गुजरी जैसा तुमने कहा था ,
हर रात वैसी ही बीती जैसा तुमसे सुना था 

हालत के मंजर पर हमने जिन्दाको रख दिया
एक एक कर हर साँस को तेरे नाम ही कर दिया
जो कभी तुमको लगे मई थक गया प्यार से
ले लेना ये जिंदगी, जो तुमने हमे दी ही नहीं
जिंदगी वैसी ही गुजरी जैसा तुमने कहा था