मेरी हकीकत हो या एक ख्वाब कहना मुस्किल है
तुम मुह्हबत हो या जीने की जरुरत कहना मुस्किल है
मैंने जीने के लिए एक ख्वाब बनाया है
वो चेहरा तुम हो ये जानकर भी भूल जाना मुस्किल है
हकीकत में जिंदगी के कुछ पन्ने ही लिखे मैंने
उन पन्नो को खुद से फाड़ देना मुस्किल है
एक झूठे सच को लेकर कब तक चलूँगा
तुम मेरी हो ये झूठ खुद से कब तक कहूँगा
सच को दिल में दबा कर तुझे याद करना मुस्किल है
लोग तो कहते ही की हम बेवफा निकले
आज तुमने जो बेवफा कहा भरी महफ़िल में
ये सुन कर भी जीना बड़ा मुस्किल है
हमने तो बेवफाई की कसम खाई थी की
तुम्हे कोई इल्जाम न दे
बिखरे तिनको जो जोड़ना बड़ा मुस्किल है
तुम्हारे इश्क ने रुसवा किया ज़माने से
यूँ अकेले तन्हा जीने में बड़ी मुस्किल है
हर एक पन्ने पे लिखा था नाम तेरा
यु ही किसी पन्ने को खो देना जरा सा मुस्किल है
