
मै डूब जाऊ कही तो मुझे खोजने मत जाना ,
ये तूफान है सागर का,
डूबते कही है और निकलते कही है ,
जो मै कही खो जाऊ तो मेरी तलाश मत करना ,
ये मेला है लोगो को ,
दिखाते एक जैसे है पर होते नहीं है ,
जो मै कभी तुम्हे लगे की भूल जाऊ तो याद मत आना
यादें तस्बीर है कल की ,
दिवार पर तो अच्छी है पर दिल में होती नहीं है ,
जो मै कभी तुम्हे इंकार कर दूँ पहचाने से तो
हैरान मत होना
ये आदत है हम इंसानों की कहते बहुत है करते नहीं हैं
जो मै कभी तुम्हे छोड़ के ग़ुम हो जाऊ कही
मेरे वास्ते दीपक मत जलना ,
इधर दुआ होगी ,उधर तो बस पतिंगा ही जला है
जो मै कभी मेरी आत्मा से नाराज हो जाऊ
परेशां मत होना ,
आवाज मत देना ,
याद मत करना ,
इंतजार भी मत करना ,
ये तो भावनाए है मन
बनती भी यही है और बिगड़ती भी यही है ,
मै डूब जाऊ कही तो मुझे खोजने मत जाना ,
ये तूफान है सागर का,
डूबते कही है और निकलते कही है ,
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