सोचता हूँ क्या रखूं जिंदगी का नाम
इसे इश्क कहू या तोफा
सोचता हूँ लिख दूँ तेरा नाम
पर डर लगता है कही तू हो ना जाये बदनाम
सोचता हूँ क्या रखूं जिंदगी का नाम !!!!
जिंदगी के पास भी हम जिंदगी के बाद भी हम
क्या कहूँ इसको? सुबह कहूँ या शाम
हर उजाला रात है ,हर अँधेरे में आस है
सोचता हूँ क्या रखूं जिंदगी का नाम
इसे इश्क कहू या तोफा
सोचता हूँ लिख दूँ तेरा नाम
पर डर लगता है कही तू हो नाजे बदनाम
सोचता हूँ क्या रखूं जिंदगी का नाम
है उछाला हाँथ से माँ ने बचपन में
जिंदगी ने क्यों उछाला है ये उल्छां
सोचता हूँ क्या रखूं जिंदगी का नाम
इसे इश्क कहू या तोफा
सोचता हूँ लिख दूँ तेरा नाम
पर डर लगता है कही तू हो नाजे बदनाम
सोचता हूँ क्या रखूं जिंदगी का नाम !!!
No comments:
Post a Comment