वो पुचाती है मुझसे एकसर की क्या किया जाये
मै कहता हूँ चलो आज जी भर के जिया जाये
ना जाने कब क्या हो जाये आने वाले कल में
क्यूँ ना आज जी भर आपकी निगाहों में खोया जाये
कहने को तो बहुत कुछ है पर डर लगता है मुझे
क्या जाने कौन सा सच उन्हें जख्म दे जाये
तुम तो हकीकत हो मेरी सांसो की
सोचता हूँ क्यूँ ना हर पल बस आप के साथ जिया जाये
मेरी तकलीफ कुछ ऐसी है की,
ना रख सकूँगा और ना कह सकूँगा
क्यूँ ना आज सब कुछ भूल के आखिरी बार
प्यार के रंगों में खोया जाये
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