
महफ़िल-ये-हसीं में एक शख्स अच्छा सा लगा ,
नज़र से मिला कर नज़र , हटाना अच सा लगा,
वो शख्स जिस पर महफ़िल की आंखें जमी हुई थीं
उस, शख्स का आदाब कहना सब से अच्छा सा लगा
सब हो गए मदहोश पी ,पी कर
सब को दे कर "जाम" हमें ना देना अच्छा सा लगा ,
कुछ देर के लिए ही सही तुम तुम तसरीफ तो लाये
उसके तसरीफ लेन की अदा देख अच्छा सा लगा
अलविदा तो सब ने कहा पर उसकी बात ही कुछ और है
झुक कर खुदा हाफिज कहना ,अच्छा सा लगा ,
ऐसे लोग और ऐसी महफ़िलें ,ये सोच के पिया
फिर हीरे का कोयले से निकलना अच्छा सा लगा !!!!!
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